जब हम पहली बार अपना कैरियर शुरू करते है तब हमारे सामने सिर्फ दो ही रास्ते दिखते है:
1) नौकरी
1) नौकरी
2) व्यवसाय
अब हमे करना क्या है यह निर्णय लेना इस कहानी के बाद शायद आसान हो जाए
एक नामी कंपनी के सामने एक समोसे की दुकान थी जिसका मालिक सम्भू था, वहा समोसे बहुत स्वादिष्ट मिलते थे इसलिए लंच टाइम मे आधिकांश कर्मचारी वहा समोसे खाने आते थे । उनमे से एक नवीन भी था जिसकी समोसे वाले से बहुत अच्छी मित्रता हो गयी थी । वह हमेशा उस समोसे वाले को अपनी कंपनी की कैंटीन मे कूक की जॉब दिलाने की बात करता था परंतु वह हमेशा मना कर देता था । समय निकलता गया, नवीन अब कंपनी मे एक बड़ी पोस्ट पर पहुच गया था इसलिए अब उसका समोसे वाले की दुकान पर आना जाना नहीं हो पाता था ।
एक दिन उसने अपने समोसे वाले दोस्त से मिलने के लिए अपनी कार उसकी दुकान वाले स्थान पर रोकी, जो की अब एक आलीशान रेस्टोरेंट बन चुकी थी, नवीन ने रेस्टोरेंट के काउंटर पर जाकर पूछा, “क्या यहा कोई सम्भू नाम का व्यक्ति है । “ तुरंत जबाब मिला, “ हा, वो हमारे मालिक है। “ नवीन ने उनसे मिलने की इक्छा जताई तो काउंटर पर मौजूद व्यक्ति ने उसे उनके पास ले गया । जब सम्भू ने नवीन को देखा तो उसने बड़ी गरम जोशी से उसका स्वागत किया। नवीन ने भी सब कुछ देखने के बाद भी उसे चिढाने के लिए उससे कहा की “क्या सम्भू जी, आज भी आप समोसे ही बेच रहे है, मुझे देखो, आज मे कंपनी का वाइस प्रेसिडेंट बन गया हु। आज मेरे पास कार है, कंपनी का दिया बंगला है । एसोराम से ज़िंदगी के मजे ले रहा हू । आगर उस समय आप मेरी बात मान जाते तो आप के पास भी यह सब होता। “
नवीन को यह बात सुनकर नौकरी और व्यवसाय मे अंतर समझ आ गया था । उमीद है यह कहानी आप को अपना कैरियर चुनने मे सहायता करेगी । परंतु कोई भी व्यवसाय अनुभव लेने के बाद या अनुभवी लोगो के साथ ही करे ।
अब हमे करना क्या है यह निर्णय लेना इस कहानी के बाद शायद आसान हो जाए
समोसे की दुकान
एक दिन उसने अपने समोसे वाले दोस्त से मिलने के लिए अपनी कार उसकी दुकान वाले स्थान पर रोकी, जो की अब एक आलीशान रेस्टोरेंट बन चुकी थी, नवीन ने रेस्टोरेंट के काउंटर पर जाकर पूछा, “क्या यहा कोई सम्भू नाम का व्यक्ति है । “ तुरंत जबाब मिला, “ हा, वो हमारे मालिक है। “ नवीन ने उनसे मिलने की इक्छा जताई तो काउंटर पर मौजूद व्यक्ति ने उसे उनके पास ले गया । जब सम्भू ने नवीन को देखा तो उसने बड़ी गरम जोशी से उसका स्वागत किया। नवीन ने भी सब कुछ देखने के बाद भी उसे चिढाने के लिए उससे कहा की “क्या सम्भू जी, आज भी आप समोसे ही बेच रहे है, मुझे देखो, आज मे कंपनी का वाइस प्रेसिडेंट बन गया हु। आज मेरे पास कार है, कंपनी का दिया बंगला है । एसोराम से ज़िंदगी के मजे ले रहा हू । आगर उस समय आप मेरी बात मान जाते तो आप के पास भी यह सब होता। “
सम्भू ने मुसकुराते हुये कहा “वह निर्णय मेरी ज़िंदगी का सबसे सही निर्णय था, आज मेरे पास वह सब साधन स्वम के है जो की तुम्हें कंपनी ने दिया हुया है। जब मेरे बच्चे काम करना शुरू करेंगे तब उन्हे एक कर्मचारी की तरह समोसे तलने की जरूरत नहीं पड़ेगी । बल्कि एक मालिक कि तरह इस रेस्टोरेंट को ओर सफल बनाने के बारे मे ही सोचना होगा। परंतु आप ऐसा नहीं कर सकते, आप अपने बच्चे को सीधे वाइस प्रेसीटेंट नहीं बना सकते। “
नवीन को यह बात सुनकर नौकरी और व्यवसाय मे अंतर समझ आ गया था । उमीद है यह कहानी आप को अपना कैरियर चुनने मे सहायता करेगी । परंतु कोई भी व्यवसाय अनुभव लेने के बाद या अनुभवी लोगो के साथ ही करे ।
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Great way of teaching a difficult lesson
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