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#25 5S सिस्टम द्वारा कार्य को आसान बनाने का तरीका

आज हम सभी को सबसे ज्यादा परेशानी वस्तुओ को खोजने मे होती है, फिर वह घर हो या कार्य क्षेत्र । यदि हमने अपने आस-पास की वस्तुओ को व्यवस्थित नह...

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Saturday, 21 December 2019

#12 दो मेंढक- किसी काम मे सफलता पाने मे प्रोत्साहन का महत्व

जीवन मे किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए होसला होना बहुत जरूरी है, परंतु कई बार हम अपनी विभलताओ से बहुत हतास हो जाते है, उस समय हमे किसी सहारे की जरूरत पड़ती है जो की आप का होसला बड़ा सके, परंतु आज के जमाने मे ऐसे लोग कम ही मिलते है और जो लोग आप को मिलेंगे वे ज़्यादातर आप की कमियो को ही आप को बताएँगे, न की आप की ताकत आप को याद दिलायेंगे। आइए एक कहानी से इसी बात को समझते है:-

"दो मेंढक"




एक बार दो मेंढक, एक गहरे गड्ढे में गिर गए, दोनों ने उछल कूद कर बाहर निकलने की बहुत कोशिश की परंतु सफल ना हो सके, उनके चिल्लाने की आवाज सुनकर अन्य मेंढक भी वहां आ गए,





सभी मेंढको ने गड्ढे की गहराई और दोनों मेंढक को लहूलुहान देखकर यह मान लिया था कि अब इनका बचना नामुमकिन है, परंतु अन्य मेंढको को देख एक मेंढक दोबारा उछल कूद करने लगा, जिससे उसे चोट लग रही थी




उसकी हालत देखकर, वहाँ खड़े मेंढको ने उसे खुद को चोट पहुँचाने से रोकने की कोशिश की, लेकिन वह दूसरे मेंढकों के चिल्लाने पर और अधिक उछलने लगा और आखिरकार बाहर आ गया।





यह देख सभी मेंढक इस बात से परेशान थे की कैसे एक नामुमकिन काम मुमकिन हो गया?

इसका कारण सिर्फ उस मेंढक का बहरा होना था। जिसके कारण उस मेंढक को अन्य मेंढको की बातें सुनाई नहीं दे रही थी परंतु देखने से उसे ऐसा लग रहा था जैसे सभी मेंढक उसे बाहर निकलने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं और इसी प्रोत्साहन से उसे हिम्मत मिल रही थी और अपने जख्मों की परवाह किए बिना वह बाहर आ सका ।

इसी तरह आप को भी इस दुनिया की परवाह किए बगेर स्वम अपने आप को प्रोत्साहित करना होगा, और अपने लक्ष्य को पाना होगा।

Thursday, 19 December 2019

#11 दो कप चाय- समय के महत्व को समझने का आसान तरीका

अगर समय का सही उपयोग किया जाये तो, हम जीवन में स्वयं के साथ साथ दुसरो को भी खुश रख सकते है, इस बात का प्रमाण में आप को एक कहानी से बताना चाहुगा.

"दो कप चाय"






एक बार एक कक्षा मे एक अध्यापक ने बच्चो को कुछ सीखने के लिए कुछ सामान अपने साथ लेकर आए, जिसमे कुछ क्रिकेट बॉल, थोड़े छोटे पत्थर, एक थैली रेत, एक काँच का जार और दो कप चाय भी लेकर आए, सभी बच्चे इस बात से हैरान थे की आज उनके अध्यापक अपने साथ इतना सामान क्यो लाये है?

अध्यापक ने सभी सामान मेज़ पर रखकर, उस काँच के जार को उठा कर सभी बच्चो से सवाल किया:-



1) क्या यह जार खाली है?
सभी का जबाब था। “हा”

परंतु अध्यापक का कहना था “नहीं” क्यो की उसमे हवा भरी हुयी थी, जो की दिखाई नहीं दे रही थी, उसके बाद अध्यापक ने उसका ढक्कन खोलकर उसमे कुछ बॉल भर दी और फिर सभी बच्चो से पूछा :-





2) क्या अब यह जार खाली है?
सभी जा जबाब था। “नहीं”

परंतु अध्यापक ने उस जार मे कुछ पत्थर उसमे डाले और जार को हिलाया, जिससे बॉल के बीच भी पत्थरो के लिए जगह बन गई थी, अब जार भरा हुया दिख रहा था, और फिर अध्यापक ने सभी बच्चो से पूछा :-




3) क्या अब ये जार खाली है?
सभी का जबाब था। “नहीं”

परंतु अध्यापक ने उस जार मे कुछ रेत भरी और पुनः जार को हिलाया, जिससे बॉल और पत्थर के बीच रेत आसानी से अपनी जगह बनाकर जार मे आ गयी थी। अब जार भरा हुया दिख रहा था, और फिर अध्यापक ने सभी बच्चो से पूछा :-



4) क्या अब ये जार खाली है?
सभी जा जबाब था। “ अब तो बिलकुल नहीं”

अब अध्यापक ने बच्चो को समझाया कि इस जार कि तरह हम सभी के पास जीने के लिए यह एक ही जीवन है, और दिन भर का समय भी सभी के पास बराबर है। इस विशाल ब्रह्मांड मे हमारे पास कुछ भी हासिल करने की क्षमता है, यदि हम अपने समय का बुद्धिमानी से उपयोग करते हैं तो हम अपने जीवन के समय को सभी के अनुकूल बना सकते है।

यहा जार तुम्हारे जीवन को दर्शाता है,

क्रिकेट बॉल आप की फ़ैमिली, आप के दोस्त, आप की हैल्थ , आप के जीवन के लक्ष्य को दिया गया समय दर्शाता है,

छोटे पत्थर आप की जॉब, आप का घर एवम आप की अन्य जरूरत की चीजों पर दिये आप के समय को दर्शाता है,

रेत आप के जीवन के मनोरंजन के साधन जैसे पार्टी, टूर, मूवीस आदि मे दिये समय को दर्शाता है,


अगर हम रेत को जार मे पहले भर लेनगे, तो जार मे बॉल और पत्थर को भरने के लिए जगह नहीं बचेगी, इस तरह आप अपने जीवन के समय को छण भर की खुशी पाने के लिए खो दोगे, उसके बाद आप के पास आपकी फॅमिली, दोस्त और अपनी सेहत के लिए समय नहीं बचेगा और हमे मजबूरन समय से समझोता करना पड़ेगा । इसलिए इस जार की तरह आप भी अपने जीवन की प्राथमिकता तय करो की आप को इसमे पहले क्या भरना है या कहे की किसके लिए समय देना है।

यह बात तो बच्चो को अच्छे से समझ आ गयी परतू अंत मे जिज्ञासा वश किसी विध्यर्थी ने पूछ लिया की इन सब मे इन दो कप चाय का क्या रोल है?



तब अध्यापक ने समझाया की आप अपने जीवन मे कितने भी व्यस्त क्यो न हो, हमेशा अपने चाहने वालों के साथ बेठकर दो कप चाय पीने/ या उनके साथ कुछ पल बिताने का समय जरूर निकालना चाहिए। यह समय बिना किसी परेशानी के अपने आप, आपके जीवन मे मिल जाएगा। ओर इतना कह कर अध्यापक ने उस जार मे दो कप चाय भी भर दी, और चाय भी जार मे आसानी से आ गया थी।

क्योकि बाकी सब वस्तुओ ने चाय को अपने अंदर सोख लिया था।

Tuesday, 26 November 2019

#06 किसान की बोरिंग-एक लक्ष्य सफलता के बराबर है





क्या आपको आपका लक्ष्य मिल नहीं रहा है तो आप को यह जरूर सोचना चाहिए की ऐसा तो नहीं की आप उस लक्ष्य तक पहुचने ही वाले थे परंतु उससे पहले ही आपने अपना रास्ता बादल लिया हो, और अन्य लक्ष्य पर चलना शुरू कर दिया हो। आओ एक कहानी से इसी बात को समझते है:-

खेत की बोरिंग


एक किसान को अपने खेत में बोरिंग करवाना था, वह किसी जानकार द्वारा पानी वाली जगह चिन्हित करवा कर वहां बोरिंग करवाता है पहले 50 फीट, फिर 100 फीट, फिर 150 फीट और 200 फीट परंतु पानी नहीं आता। उसे किसी ने कहा यह गलत जगह है, पानी यहा नहीं निकलेगा, तो वह उस व्यक्ति की बात मानकर अन्य जगह बोरिंग करवाने लगता है, परंतु वहां पर भी पानी नहीं निकला, इसी तरह लोगो की बातों में आकर उसने कई जगह बोरिंग करवाया, परंतु वहां भी पानी नहीं निकला। इस तरह उसका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो गए, अंततः इस हालत को देख किसान की पत्नी को रहा नहीं गया, ओर उसने अपने पति को सलाह दी की आप किसी की बात ना मानकर सिर्फ एक जगह पर ही बोरिंग करवाएं और तब तक कराये जब तक कि पानी ना निकल जाए,उस किसान को अपनी पत्नी की बात सही लगी और उसने अगले दिन फिर से उसी जगह बोरिंग करवाना शुरू किया जहा वह सबसे पहले बोरिंग करवा रहा था,100 फीट और खोदने पर किसान को उसी जगह भरपूर पानी मिल गया जहा उसने काम बंद करवा दिया था,

इसलिए हमेशा अपने लक्ष्य को एक रखें और तब तक उसे ना छोड़े जब तक उसे पा ना लो ।

Sunday, 24 November 2019

#05 समोसे की दुकान-जॉब और व्यवसाय मे अंतर समझती कहानी

जब हम पहली बार अपना कैरियर शुरू करते है तब हमारे सामने सिर्फ दो ही रास्ते दिखते है:
1) नौकरी 
2) व्यवसाय 

अब हमे करना क्या है यह निर्णय लेना इस कहानी के बाद शायद आसान हो जाए

समोसे की दुकान

Samosa Shop Story showing the difference between a job and a business


एक नामी कंपनी के सामने एक समोसे की दुकान थी जिसका मालिक सम्भू था, वहा समोसे बहुत स्वादिष्ट मिलते थे इसलिए लंच टाइम मे आधिकांश कर्मचारी वहा समोसे खाने आते थे । उनमे से एक नवीन भी था जिसकी समोसे वाले से बहुत अच्छी मित्रता हो गयी थी । वह हमेशा उस समोसे वाले को अपनी कंपनी की कैंटीन मे कूक की जॉब दिलाने की बात करता था परंतु वह हमेशा मना कर देता था । समय निकलता गया, नवीन अब कंपनी मे एक बड़ी पोस्ट पर पहुच गया था इसलिए अब उसका समोसे वाले की दुकान पर आना जाना नहीं हो पाता था ।


एक दिन उसने अपने समोसे वाले दोस्त से मिलने के लिए अपनी कार उसकी दुकान वाले स्थान पर रोकी, जो की अब एक आलीशान रेस्टोरेंट बन चुकी थी, नवीन ने रेस्टोरेंट के काउंटर पर जाकर पूछा, “क्या यहा कोई सम्भू नाम का व्यक्ति है । “ तुरंत जबाब मिला, “ हा, वो हमारे मालिक है। “ नवीन ने उनसे मिलने की इक्छा जताई तो काउंटर पर मौजूद व्यक्ति ने उसे उनके पास ले गया । जब सम्भू ने नवीन को देखा तो उसने बड़ी गरम जोशी से उसका स्वागत किया। नवीन ने भी सब कुछ देखने के बाद भी उसे चिढाने के लिए उससे कहा की “क्या सम्भू जी, आज भी आप समोसे ही बेच रहे है, मुझे देखो, आज मे कंपनी का वाइस प्रेसिडेंट बन गया हु। आज मेरे पास कार है, कंपनी का दिया बंगला है । एसोराम से ज़िंदगी के मजे ले रहा हू । आगर उस समय आप मेरी बात मान जाते तो आप के पास भी यह सब होता। “


सम्भू ने मुसकुराते हुये कहा “वह निर्णय मेरी ज़िंदगी का सबसे सही निर्णय था, आज मेरे पास वह सब साधन स्वम के है जो की तुम्हें कंपनी ने दिया हुया है। जब मेरे बच्चे काम करना शुरू करेंगे तब उन्हे एक कर्मचारी की तरह समोसे तलने की जरूरत नहीं पड़ेगी । बल्कि एक मालिक कि तरह इस रेस्टोरेंट को ओर सफल बनाने के बारे मे ही सोचना होगा। परंतु आप ऐसा नहीं कर सकते, आप अपने बच्चे को सीधे वाइस प्रेसीटेंट नहीं बना सकते। “

नवीन को यह बात सुनकर नौकरी और व्यवसाय मे अंतर समझ आ गया था । उमीद है यह कहानी आप को अपना कैरियर चुनने मे सहायता करेगी । परंतु कोई भी व्यवसाय अनुभव लेने के बाद या अनुभवी लोगो के साथ ही करे ।


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Friday, 15 November 2019

#03 दो गरीब मछुआरे-कैसे आप की कम कमाई भी आप को अमीर बना सकती है

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ज्यादातर लोगों के मन में यह सवाल होता है।

अमीर कैसे बने ?????

जवाब पाने के लिए इस कहानी को ध्यान से पढ़ें।

"दो मछुआरों की कहानी (A Story of Two Fisherman)"

The story of two fishermen who tell the difference between the thinking of rich and poor.

एक शहर मे दो आदमी थे, एक अमीर और एक गरीब।



गरीब आदमी हमेशा भगवान से अपनी गरीबी की शिकायत करता रहता था ओर अपने भाग्य को कोसते रहता था। उसकी शिकायत थी की उस अमीर आदमी को भगवान सब कुछ आसानी से दे देते है ओर उसे उसकी कड़ी मेहनत के बाद भी बहुत कम मिलता है।

यह देख भगवान ने उसे एक दिन सबक सिखाने के लिए उन दोनों आदमियो को एक जैसी स्थिति मे लाकर रख दिया और दोनों को कमाई के लिए एक मछली पकड़ने की छड़ थमा दी ।

The story of two fishermen who tell the difference between the thinking of rich and poor.
The story of two fishermen who tell the difference between the thinking of rich and poor.




अब उन दोनों की कमाई का जरिया और घर की स्थिति एक समान थी। वे दोनों सुबह से मछ्ली पकड़ने जाते और शाम तक 10-10 मछलिया पकड़कर घर लाते।
पहला आदमी जो पहले से गरीब था उन दसो मछलियों को बेचकर ₹2000 रुपये घर लाता है, ओर उस शाम वह बहुत खुश रहता है और उसकी पूरी फैमिली को बाहर खाना खिलाने ले जाता है और पूरे पैसे खर्च कर देता है इस तरह वह रोजाना सारी मछलियां बेचकर पूरे पैसे खर्च कर देता था ।


The story of two fishermen who tell the difference between the thinking of rich and poor.

परंतु दूसरा व्यक्ति जो अमीर से गरीब हुआ था उन 10 में से 9 मछलियां बेच कर ₹1800 रुपये घर लाता है ओर एक मछली वह घर पर अपनी family के साथ पका कर खा लेता है

और अगले दिन के लिए ₹1000 रुपये का मछली पकड़ने का एक ओर छड़ लाता है तथा ₹500 रुपये में एक ओर आदमी को अपने साथ नौकरी पर रख लेता है और अपनी शेविंग के रूप में ₹300 रुपये जमा भी कर लेता है। इस तरह वह दूसरे दिन 20 मछलिया पकड़ पता है 19 मछलिया बेचकर ₹3800 घर लाता है 
The story of two fishermen who tell the difference between the thinking of rich and poor.




 

इन पैसो से भी वह 2000 रुपए के दो और छड़ खरीद लेता है ओर ₹500 रुपये के दो आदमियों को और अपने साथ नौकरी पर रख लेता है ओर ₹300 रुपये पुनः अपनी शेविंग के रूप में जमा कर लेता है और दौवारा से एक मछली अपनी फैमिली के साथ पका कर खा लेता है। इस तरह वह आदमी 2 दिनों में अपने लिए ₹600 रुपये सेविंग भी कर लेता है और अपने साथ 4 लोगों की एक टीम भी बना लेता है और अपने मछली पकड़ने के छड़ को भी एक से चार कर लेता है, हां वह अपनी फैमिली को स्वादिष्ट खाना तो नहीं खिला पाता, परंतु इतना जरूर खिलता है की उन सभी का पेट भर जाए। इस तरह वह लगातार अपनी तरक्की के रास्ते को बनाते जाता है और कुछ ही दिन में पहले से भी ज्यादा अमीर बन जाता है और जो पहला व्यक्ति रहता है वैसा ही गरीब का गरीब रह जाता है । 


The story of two fishermen who tell the difference between the thinking of rich and poor.


इसलिए किस्मत के भरोसे आप कभी अमीर बन भी गए तो आपको दोबारा गरीब बनने में देर नहीं लगेगी, अगर आप अपनी सोच पहले आदमी की तरह रखोगे तो।

एक अमीर और गरीब आदमी की विचारधारा (Ideology of a Rich man and Poor man)

        एक अमीर आदमी हमेशा पहले अपनी संपत्ति बनाता है उसके बाद वह अपनी जरूरतों पर खर्च करता है। जिससे वह अमीर से और अमीर होते जाता है। इस तरह वह हमेशा अपने काम मे एक निवेशक की सोच रखता है और अपनी तरक्की के रास्ते बनाते जाता है।

        परंतु एक मध्यम वर्ग का आदमी, हमेशा अपने पैसे पहले अपनी जरूरतों पर खर्च करता हे, जिससे उसकी जरूरते तो तेज़ी से बढ़ती जाती हे, परंतु उसकी आमदनी उस अनुपात मे नहीं बढ़ती जिससे वह एक समय उस स्थिति मे पहुच जाता है जहा उसके खर्चे उसकी आमदनी से ज्यादा हो जाते है, और इस स्थिति से वह अपनी मौजूदा आमदनी के सहारे बाहर नहीं निकाल पाता, और माध्यम वर्ग मे ही अपनी उम्र निकाल देता है। इस तरह वह हमेशा अपने पैसे को एक उपभोक्ता की तरह सिर्फ खर्च करता है जिसका रिटर्न उसे कुछ नहीं मिल पता।

इसलिए सबसे पहले अपनी सोच अमीरों वाली करे, आप की कम कमाई भी आप को अमीर बना सकती है ।

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