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#25 5S सिस्टम द्वारा कार्य को आसान बनाने का तरीका

आज हम सभी को सबसे ज्यादा परेशानी वस्तुओ को खोजने मे होती है, फिर वह घर हो या कार्य क्षेत्र । यदि हमने अपने आस-पास की वस्तुओ को व्यवस्थित नह...

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Wednesday, 4 March 2020

#23 Assets and Liability || इस फोर्मूले से आप अपना बैंक बैलेंस बढ़ा सकते हैं ||

परिभाषा

आज हम पैसे कमाने के उस फॉर्मूले के बारे में जानेगे, जिससे की आप अपना बैंक बैलेंस बढ़ा सकते है और वह फार्मूला है :-

Income>Expenses


यदि आप को भी अमीर आदमी बनना है, तो आप को अपनी कुल आमदनी, आपके कुल खर्चो से हमेशा ज्यादा रखनी होगी। अकाउंट की भाषा मे कहे तो,

Assets>Liability



Today we will learn about that formula of earning money, by which you can increase your bank balance. And that formula is: -Assets>Liability
आपके कुल एसेट्स आपके कुल खर्चो से हमेशा ज्यादा होना चाहिए और इस बात का भी विशेष ध्यान रखना होगा की आप कितना भी कमाते हो परंतु उसमे से कितना और कहा खर्च करते हो, ये जरूरी है।
अब एसेट्स और लायबिलिटी को हम विस्तार से समझते है।

1) Assets 
:- वे साधन जिनसे आप पैसे कमा सकते है या उन्हे बेचकर पैसे बना सकते है।

Example:-
1)Fix Property
2)Rental Property
3)Businesses
4)Shops
5)Inventory
6)Machinery's/Tools
7)FD/Bonds
8)Stocks
9)Bank Balance
10)Patents
11)Trademarks
12)Gold
13)Insurance

2) Liability :- 
वे साधन जिनसे आप के पास के पैसे सिर्फ खर्च होते है।

Example:-
1)Loan
2)Credit Cards
3)Home Rent
4)Electricity Bill
5)Car
6)
Cases in Court 
7)
Income Tax
8)Mobile Bill
9)DTH Bill
10)Branded Dress
11)Tour & Travels
12)Party's

एक अमीर आदमी हमेशा पहले अपने एसेट्स बनाता है उसके बाद वह अपनी लायबिलिटी पर खर्च करता है। जिससे वह अमीर से और अमीर होते जाता है। परंतु एक मध्यम वर्ग का आदमी हमेशा अपने पैसे पहले अपनी लायबिलिटी पर खर्च करता हे, जिससे उसकी लायबिलिटी तो तेज़ी से बढ़ती जाती है और आमदनी कम पड़ने लगती है जिससे उसके अमीर बनाने का सपना पूरा नहीं हो पाता।

इसलिए हमारे बुजुर्गो ने कहा है "जितनी चादर, उतने ही पैर पसारना चाहिए। "

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Tuesday, 7 January 2020

#15 How to learn English without join any coaching || बिना कोचिंग जाए इंग्लिश बोलना कैसे सीखे ||



किसी भी भाषा को सीखना हमे बहुत कठिन काम लगता है परंतु क्या आपने कभी ये सोचा है की जब आपने बोलना शुरू किया था, उस समय तक न तो आपने कोई स्कूल मे एड्मिशन लिया था और न ही कोई कोचिंग शुरू की थी। अब सवाल आता है कैसे?

यहाँ मैं हिन्दी और इंग्लिश दो भाषाओ को लेकर आप को समझने की कोशिश करता हू, जो लोग हिन्दी बोलने वाले है मैं उनसे कहना चाहता हू की जब आप को बिना स्कूल जाए हिन्दी बोलना आ सकता है तो इंग्लिश बोलना भी आ सकता है। जब आप बच्चे थे तब आप अपने आस-पास की चीज़ों को पहले समझने की कोशिश करते है, फिर उसे टूटा-फूटा बोलते है, और धीरे धीरे आप की समझ बढ़ती चली जाती है और आप एक पूरा वाक्य बोलने लगते है।

मान लीजिये आप अभी भी छोटे बच्चे है, और आप को प्यास लगी है परंतु आप को अभी बोलना नहीं आता, तब आप अपनी बात को दूसरों तक या तो इसारो से समझयेंगे या उस एक शब्द (पानी) को बोल कर अपनी बात कह देंगे, जो कभी किसी ओर से आप ने सुना होगा। इस तरह आप रोजाना उस बात को बोलते है और हर बार आप उस वाक्य को सही बोलने की कोशिश करते है, और एक समय ऐसा भी आ जाता है जब की आप उस वाक्य को सही-सही और स्पष्ट बोलने लग जाते है। ऐसा इसलिए हो पाता है क्योकि आप जिस भाषा मे सोचते है, उसे समझते है, उसी भाषा मे आपको उसे बोलना होता है। इसलिए वह हमारी मात्रभाषा हो जाती है। फिर वो चाहे इंग्लिश हो, चाईनिश हो, फ्रेंच हो या अन्य कोई भाषा।

अब बारी जब अन्य कोई भाषा बोलने की या कहे हिन्दी से इंग्लिश बोलने की आती है तब ज्यादातर लोग यह गलती करते है । वे सभी सोचते हिन्दी मे, उसे समझते हिन्दी मे ओर फिर उसे अनुवाद करते है इंग्लिश मे, फिर उसे बोलते है। इसलिए ज्यादातर लोग धाराप्रवाह अंग्रेजी नहीं बोल पाते है। जब तक आप ये अनुवाद करना बंद नहीं करेंगे तब तक आप किसी भी भाषा मे परिपक्ता हासिल नहीं कर सकते। इसीलिए सोचो भी उसी भाषा मे जिसमे आपको बोलना है।

अब यदि आपको उस भाषा मे बात करने वाला नहीं मिलता है तब क्या करे?

ऐसी स्थिति मे आप को एक डायरी बनाना चाहिए जिसमे आप सिर्फ एक ही भाषा का उपयोग करे, जिसमे आप को सोचना भी उसी भाषा मे है, समझना भी उसी भाषा मे है और लिखना भी उसी भाषा मे है, फिर वह चाहे इंग्लिश हो या हिन्दी या अन्य कोई भाषा।

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#14 अपने सपनों को हकीकत बनाने का अचूक तरीका



सपने कई तरह के होते हैं और उन्हें देखने का तरीका भी अलग अलग हो सकता है, एक होता है बेसुध अवस्था में देखा गया सपना, मतलब नींद में, जो कि हर बार अलग अलग हो सकता है और एक होता है खुली आंखों से देखा सपना जो कि हर बार एक जैसा होता है, हर इंसान के दिल की गहराइयो मे कुछ सपने होते है जिनहे वे पूरा करना चाहते है। जैसे पायलट बनने का सपना, क्रिकेटर बनने का सपना, एक्टर बनने का सपना, अमीर बनाने का सपना आदि, परंतु क्या आपने उन सपनों को पूरा करने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाया है, आपके सपने की ओर आप का पहला कदम, बहुत मुश्किल हो सकता है, यह भी हो सकता है की आप अपने आप से कह दे की मुझसे नहीं हो पाएगा । लेकिन फिर भी आप को आपका सपना पूरा करना बहुत जरूरी है तो कभी भी आप मुश्किलों के खतम होने का इंतजार न करे । जिस प्रकार किसी नदी के किनारे पर खड़े होकर तैरना नहीं सीखा जा सकता, उसके लिए नदी में कूदना आवश्यक है।





उसी तरह आप अगर मुश्किलों के खतम होने का इंतजार करोगे तो कभी भी अपने सपने पूरे नहीं कर पाओगे। आप को अपना सपना रोजाना अपनी आंखो के सामने रहना जरूरी है, इसके लिए आप अपने सपने की एक फोटो बना कर अपने बेड के सामने की दीवार पर लगा दे, जिससे कि रोजाना सुबह उठते से ही आप उसे याद रख सके और रोजाना उस सपने को पाने की योजना तैयार कर सके,









इस तरह आप एक सीढ़ी का निर्माण कर रहे होते हैं जो कि अंत में ऊंचाई पर रखे आपके लक्ष्य तक पहुंचाएगी।

Saturday, 28 December 2019

#13 एक संगठन को सफलतापूर्वक चलाने और तेजी से विस्तार करने के लिए प्रभावी प्रबंधन जरूरी

किसी भी कंपनी या संगठन को सफलता पूर्वक चलाने के लिए उसमे बहुत से लोगो की एक टीम का होना आवश्यक होता है। हर कंपनी या संगठन मे उसका एक संस्थापक भी अवश्य होता है, जो की उस कंपनी या संगठन की नीव रखता है ओर उसके बाद उसमे लोग जुडते जाते है और एक छोटी सी टीम एक बड़ी टीम का रूप ले लेती है, इस टीम मे सभी लोगो के पास अपनी-अपनी एक अलग ज़िम्मेदारी होती है और संस्थापक का काम उन सभी को मार्गदर्शन देना होता है, कभी भी किसी भी संस्थापक का स्वभाव अपनी टीम के साथ मालिकाना हक जताने जैसा नहीं होना चाहिए। ऐसी स्थिति मे टीम के बिखरने की संभावना ज्यादा हो जाती है, ओर उसके बंद होने की संभावना भी ज्यादा हो जाती है।

आइए इसे हम एक उदाहरण लेकर समझते है:-

 
      
एक 20 फीट उच्चा झण्डा है, उसे एक आदमी द्वारा एक पथरीली जमीन पर खड़ा किया जाता है, कुछ देर तक तो उससे सम्भालना आसान होता है परंतु तेज़ हवा के साथ झण्डा असंतुलित होने लगता है, इसलिए वह आदमी कुछ ओर लोगो को अपने कार्य मे सहायता के लिए बुलाता है, और उन्हे झंडे को पकड़ कर संतुलित करने को कहता है, इस तरह 4-5 लोग उस झंडे को पकड़ कर रखते है, जिससे वो झण्डा तेज़ हवा आने पर भी संतुलित बना रहता है, अब कुछ ओर लोग भी उसके इस काम मे मदद के लिए आते है तब वह उन्हे उस झंडे को बिना सहारे के खड़े रहने के लिए एक चबूतरा बनाने का कार्य सोंपता है।


यहा झण्डा किसी कंपनी या संगठन को दर्शाता है। वह आदमी कंपनी का संस्थापक है और उसके साथ जुडने वाले लोग कंपनी या संगठन के सदस्य है।

अब यहा दो स्थिति बनती है:-

1) अगर पहला आदमी उस काम मे स्वम को व्यस्त रखता है और अन्य जुडने वाले लोगो की जरूरत न होने की स्थिति मे, उन्हे किसी अन्य कार्य की ज़िम्मेदारी नहीं दे पता और लोग टीम मे सामिल हुये बिना वहा से चले जाते है ।
2) अगर पहला आदमी उस काम को टीम के अन्य लोगो को सोंपकर अपने आप को मुक्त करके, टीम के नए जुड़े लोगो का मार्गदर्शन करता है ओर उस काम से जुड़ी अन्य गतिविधियो को, नये जुडने वाले लोगो को करने को कहता है, जैसे उस झंडे के लिए कोंक्रीट का चबूतरा बनाना और उसे बनाने मे लगने वाले समान को एकत्र करना आदि ।

पहली स्थिति मे कंपनी या संगठन के संस्थापक की शुरुआत तो अच्छी होती है परंतु उसका कमजोर प्रबंधन होने के कारण कंपनी या संगठन मे नए लोग जुडने की कोशिश तो करते है परंतु उनके लिए कोई ज़िम्मेदारी न होने के कारण वे लोग टीम मे जुड़ नहीं पाते और संस्था मे सीमित लोग ही टीम मे रह जाते है, जिससे संस्था का विस्तार नहीं हो पाता है ।



दूसरी स्थिति मे भी संस्था के संस्थापक की शुरुआत अच्छी होती है परंतु यहा संस्थापक का प्रबंधन मजबूत होता है जिससे वह अपनी जिम्मेदारियो से मुक्त होकर अन्य लोगो का मार्गदर्शक बनता है और नए नए लोगो को नयी नयी जिम्मेदारियो के साथ अपनी टीम मे जोड़ते जाता है। इस तरह सभी लोगो के पास संस्था मे जुड़े रहने का उद्देश्य होता है और संस्था का विस्तार भी तेज़ी से होता है। एक संगठन को सफलतापूर्वक चलाने और तेजी से विस्तार करने के लिए प्रभावी प्रबंधन होना आवश्यक होता है।

अब यहा एक तीसरी स्थिति की भी संभावना होती है जिसमे झण्डा पकड़ने वाले व्यक्ति के पास लोगो को जोड़ने की काबिलियत तो होती है परंतु उसका मार्गदर्शन कमजोर होता है जिससे वह सभी लोगो को उसे पकड़ कर रखने को कहता है जिससे उसे तो सहारा मिलता है परंतु झंडे को नहीं मिलता, ऐसी स्थिति मे अगर वह व्यक्ति झंडे को छोड़ दे तो झण्डा गिर जाएगा। यह स्थिति तब बन सकती है जबकि संस्थापक का मार्गदर्शन गलत हो और उससे जुडने वाले लोग भी उसे बिना सलाह दिये ही उसकी हर बात मानते जाए। ऐसी स्थिति मे संस्थापक के न रहने पर टीम का कोई भी सदस्य कंपनी को संभाल नहीं सकता और कंपनी का बंद होना भी स्वभाभिक है।

Thursday, 12 December 2019

#10 कम्युनिकेशन गैप और इस समस्या के समाधान के लिए 6 बिन्दु





एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक अपनी बात पहुंचाना संचार कहलाता है यह दो या दो से अधिक लोगों के बीच होता है लेकिन जरूरी नहीं कि आपने जो मैसेज आप के बाद जिस व्यक्ति को दिया है, अंत तक वह उसी तरह रहे। इस स्थिति को कम्युनिकेशन गैप कहते है, ओर यह अन्तर बनना भी स्वाभाविक बात है।

आइए जानते है कम्युनिकेशन गैप को विस्तार से:-

आप 20 लोगों की एक टीम बनाएं, उसके बाद पहले व्यक्ति को अपना एक मैसेज दें, आप सभी को इस मैसेज को आगे वाले व्यक्ति के कान में कहने को कहें। मानिए मैसेज है
“उससे पकड़ो मत, जाने दो”
लेकिन जब आखिरी व्यक्ति इसी मैसेज को आपको बताएगा तो वह कुछ ओर हो जाएगा या उसका अर्थ भी अलग हो सकता है, हो सकता है अब आप का ही मैसेज आप को यह मिले
“उससे पकड़ो, मत जाने दो”
ऐसा होना स्वाभाविक बात है परंतु ऐसा ना हो इसलिए हमें क्या करना चाहिए,

इसका समाधान इन छ: बिन्दुओ से हो सकता है :-

1)अच्छे स्रोता बने : -
एक अच्छा स्रोता हमेशा किसी भी कही गयी बात को अच्छे से सुनता है, उससे समझता है ओर उससे याद रखने की कोशिश करता है।

2) बात को दोहराए: - जब भी आप को कोई बात कही जाए तो उसे दोहरा कर confirm जरूर कर ले कि जो आप ने सुना वही आप ने समझा है।

3) पेपर मे लिखे : -
जब भी आप को किसी बात को सुनने के बाद लगे कि आप उससे भूल सकते है तो उससे किसी पेपर पर जरूर लिख ले, और दोवारा उस बात को कहने से पहले उससे पढ़ ले।

4) आप से कही गयी बात को दोवारा पूछे :-
जब भी आप को किसी सूचना को आगे पहुंचाना हो और यदि आप को लगता है कि आप उस मैसेज/सूचना को भूल गए है तो उससे दोवारा पूछ ले परन्तु कभी भी गलत सूचना को आगे न जाने दे ।

5) शब्दावली का ध्यान रखे: -
हमेशा आप से कही गई बात का अर्थ जरूर समझे, नहीं तो आप सुनेगे कुछ ओर और समझाएँगे कुछ ओर।

6) पुष्टि करे: -
हमेशा अपने द्वारा कही किसी भी बात कि पुष्टि जरूर कर ले, इसके लिए आप को अपने साथी से उस बात को दोहरने के लिए कहना होगा। इसका सबसे अच्छा उदाहरण आप ने स्कूल मे देखा होगा जहा एक शिक्षक हमेशा अपने पढ़ाये पाठ को बच्चो से दोहराता है।

जब आप कि पूरी टीम इन छ : बिन्दुओ को ध्यान मे रखेगी तब आप का मैसेज आखरी व्यक्ति तक वैसा ही पहुचेगा जैसा की आप ने पहले व्यक्ति को दिया था।

Thursday, 5 December 2019

#09 कुश्ती के खेल से सिखे अपने आत्मविश्वास को बढ़ाना

अगर आपके अंदर विश्वास की कमी है तो आपको कुश्ती के खेल से कुछ सीखना चाहिए।

अपने कुश्ती देखी होगी उसमें दोनों ही खिलाड़ी हटे कट्टे दिखाई देते हैं परंतु अंत में जीत सिर्फ एक की ही होती है ऐसा क्यों कभी सोचा है?



कुश्ती के खेल में तैयारी तो दोनों ही अच्छी करते हैं मगर खेल के अंत मे जीत किसी एक की ही होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योकी जीतने वाले खिलाड़ी का अवलोकन अच्छा होता है, वह अपने विपक्षी के आत्मविश्वास और उसकी ताकत को कम करता है और उसकी कमजोरी को समझ कर उस पर आक्रामक होता जाता है जिससे उसका डर खतम हो जाता है और वह अपने ऊपर विश्वास के साथ जीत जाता है।
उसी तरह अगर हम अपने ऊपर विश्वास को नहीं रखते हैं तो थोड़ी ही प्रॉब्लम आने पर हम अपने आप को हारा हुआ महसूस करते हैं । जैसे कुश्ती में जब हारने वाला खिलाड़ी अपने पॉइंट्स खोते जाता है तो उसका विश्वास अपने आप पर कम होता जाता है, और विपक्षी खिलाड़ी का बढ़ते जाता है । इस कारण अंततः एक खिलाड़ी दूसरे खिलाड़ी की इसी कमजोरी का फायदा उठाकर उसकी कमजोरियों को निशाना बनाता है और अंततः जीत जाता है।
अपने ऊपर विश्वास का एक बहुत अच्छा उदाहरण है Mr. Brain Acton,




जिनहे अपने ऊपर इतना विश्वास था की जब Acton को फेसबुक से रिजेक्शन मिला तो वह हारे नहीं और Whatsapp बना डाला,


और Whatsapp की लोकप्रियता इतनी जायदा होने लगी थी की बाद में फेसबुक को 19 बिलियन डॉलर में Whatsapp को खरीदा पड़ा था ।

इसी तरह जब तक आप भी अपने ऊपर विश्वास रखेंगे तबतक आप की जीत भी आपके पास आने से अपने आप को रोक नहीं पाएगी ।

Tuesday, 19 November 2019

#04 सफलता पाने के लिए सुविधा क्षेत्र से बाहर निकालना जरूरी


Definition of Comfort Zone and How can you come out of this zone


हर इंसान का अपना-अपना एक सुविधा क्षेत्र (Comfort Zone) होता है, जिसके अंदर रहकर वह बिना डरे काम करता है परंतु इस ज़ोन के बाहर जाने पर वह डरा हुआ महसूस करता है,


उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति दोस्तों के बीच बहुत बातें करता है परंतु यदि उसे स्टेज पर खड़े होकर बोलने का बोला जाए तो वह नहीं कर पाता क्योंकि यह उसके सुविधा क्षेत्र (Comfort Zone) के बाहर का काम है इसलिए जीवन में एक बार हर वो काम करें, जिससे आपको डर लगता है, जैसे किसी अजनबी से बात करने का डर, किसी competition में भाग लेने का डर, अकेले सफर करने का डर और भी डर जो की आपके अंदर हो । अगर पहली बार वह काम आप ने किया तो ज्यादा से ज्यादा क्या होगा, बस कभी परेशानी हो जाएगी, कभी कुछ बेज्जती भी हो सकती है, तो कभी कुछ अच्छा अनुभव भी रहेगा, लेकिन हर काम के बाद आप अपने सुविधा क्षेत्र (Comfort Zone) को बढ़ाते जाएंगे और दूसरी बार वही काम करने मे आपको आसानी होगी।

आओ एक और उदाहरण से इसे समझते है, अगर आप नौकरी करते है तो वह भी आप का एक comfort Zone है, जहा से आप को हर महीने एक fix income आती रहती है। परंतु अगर आप को कोई कहे की आप नौकरी छोड़ कर व्यवसाय करना शुरू कर दे तो, यह काम आप के comfort zone से बाहर का हो जाएगा। परंतु आप को सफल होना है तो आप को यह कदम उठाना पड़ेगा। आप इस comfort zone से बाहर कैसे आ सकते है इसे हम step by step समझते है:-


1) Fear Zone भय क्षेत्र (Leak of Self Confidence): - 
सबसे पहले आपको एक डर का सामना करना पड़ेगा, जिसमे वो सभी चीजे आप के सामने आएगी जो की व्यवसाय न चलने की स्थिति मे आप को सामना करना पड़ेगा, जैसे:- बिना आमदनी के घर खर्च चलाना, बच्चो की फीस, हॉस्पिटल का खर्च इत्यादि। इस डर को दूर करने के लिए आप को अपना Self Confidence Level बढ़ाना पड़ेगा, और यह तब ही संभब है जब की आप कुछ महीने की बचत पैसे का backup बना कर रखेगे। इससे आप को बिना डरे व्यवसाय करने की हिम्मत मिलेगी ।

2) Learning Zone शिक्षा क्षेत्र (Challenges, New Skills): - 
अब अगर आप ने अपने डर पर जीत हासिल कर के व्यवसाय शुरू कर भी लिया तो comfort zone की दूसरी step मे आप को बहुत सारी चुनोतीय भी मिलेगी जैसे product की demand का कम या ज्यादा होना, इससे आप के व्यवसाय पर बहुत फर्क पड़ेगा, इससे आप को डर कर पीछे नहीं हटना है वल्कि अपनी मोजूदा skill के साथ –साथ कुछ नयी skill को भी सीखना पड़ेगा। जिससे आप को अपने व्यवसाय को आगे ले जाने मे बहुत मदद मिलेगी ।


3) Growth Zone विकास क्षेत्र (Achieve Goal, Set New Goal): -
जब आप इन दो स्टेप को सफलता से पर कर लोगे तब आप का Confidence Level भी आप को बड़ा हुआ मिलेगा और आप अपने तत्कालीन लक्ष्य को तो हासिल करोगे ही साथ ही नए लक्ष्य को हासिल करने का होसला भी आपके अंदर आ चुका होगा ।




इस तरह, अपने वर्तमान सुविधा क्षेत्र को बढ़ाने के साथ-साथ, आप दूसरे आराम क्षेत्र को बढ़ाने का साहस भी जुटा सकते हैं।


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