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#25 5S सिस्टम द्वारा कार्य को आसान बनाने का तरीका

आज हम सभी को सबसे ज्यादा परेशानी वस्तुओ को खोजने मे होती है, फिर वह घर हो या कार्य क्षेत्र । यदि हमने अपने आस-पास की वस्तुओ को व्यवस्थित नह...

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Saturday, 14 March 2020

#25 5S सिस्टम द्वारा कार्य को आसान बनाने का तरीका

आज हम सभी को सबसे ज्यादा परेशानी वस्तुओ को खोजने मे होती है, फिर वह घर हो या कार्य क्षेत्र । यदि हमने अपने आस-पास की वस्तुओ को व्यवस्थित नहीं रखा, तो आप को समय की बर्बादी होना निश्चित है। अगर आप को इससे बचना है तो आप को 5S सिस्टम अपनाना चाहिए । इस सिस्टम से आप समय के साथ-साथ अनावश्यक वस्तुओ को भी अलग कर सकते है और साफ सफाई को बनाए रख सकते है ।
आइए जानते है 5S सिस्टम क्या है ?
एक जापानी विचारधारा, जिसके अंतर्गत मैनेजमेंट तथा कर्मचारियो के सहयोग द्वारा अपने कार्यस्थल, मशीन, उपकरण आदि के अच्छे रखरखाव एवं सुरक्षित वातावरण को बनाया जाता है, जिसे 5S कार्यप्रणाली के नाम से जाना जाता है, 5S कार्यप्रणाली की स्थापना पाँच जापानी शब्दों के माध्यम से की गई थी, जिनका अंग्रेजी शब्दों में अनुवाद इस प्रकार है: -

Seiri =Sort (छटाई )
Seiton =Set in Order (क्रम में लगाएं)
Seiso =Shine (सफाई )
Seiketsu =Standardize (मानक बनाए)
Shitsuke =Sustain (प्रतिपालन)


इसे क्रमशः पाँच चरणों में किया जाता है ।

1S=Sort
जो भी आवश्यक हो उसे रखे और बाकी सब वस्तुओ को हटा दे ।

2S=Set in Order
सभी चीज़ों की जगह और सभी चीज़ अपनी जगह पर होना चाहिए ।

3S=Shine 
कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए कार्यस्थल और जरूरत की वस्तुओ को साफ रखे ।

4S=Standardize
पूरे कार्यस्थल को ज़ोन मे बंटे और नियम लागू करे और नियमो का पालन करे ।

5S=Sustain
नियमित रूप से 5S के कार्यो को अपनी आदत बनाए ।
5S system flow chart


Sorting: - 
अपने कार्य क्षेत्र के समान पर नजर डाले और तय करे की कौन सा समान आपके लिए रोजाना उपयोग मे आता है, कौन सा महीने मे एक बार उपयोग आता है, कौन सा साल मे एक बार उपयोग होता है, और कौन सा बिलकुल काम का नहीं है। अनावश्यक वस्तुए आपके कार्य का स्थान घेरेगी और आपकी रोजाना उपयोग की वस्तुए ढूंढने मे भी परेशानी पेदा करेंगी । इन वस्तुओ की छटाई करने के लिए पहले उन वस्तुओ को पहचानना और उनकी सूची बनाना पड़ेगा, जो आप के उपयोग की है और जो अनावश्यक है। छटाई के लिए टेग सिस्टम का उपयोग करे Methods of sorting in 5S System

Set In Order: - 
सभी वस्तुओ का स्थान निर्धारित करे और सभी वस्तुओ को निर्धारित स्थान पर रखे । ऐसा करने से वस्तुए उपयोग के लिए आसानी से मिल जाती है। Set in Order के लिए Signboard का उपयोग करे ।


Shine: -
अपने कार्य क्षेत्र और उपकरणो को रोजाना साफ रखे, और सफाई की ज़िम्मेदारी स्वयं ले ।

Standardize: - 
हर क्षेत्र का एक नाम दे और वहा 1s , 2s , 3s के रोजाना पालन के नियम बनाए।

Sustain: - 
सभी लोगो को 5s का रोजाना की क्रियाओ मे पालन करने का निर्देश दे और इसे आदत बनाने की कोशिश करे । प्रत्येक जोन की निगरानी के लिए दूसरे जोन के ही लीडर को नियुक्त करे और स्कोर दिलाये ।





किसी कंपनी या संस्थान जैसे स्कूल, विश्वविध्यालय, हॉस्पिटल मे 5s सिस्टम लागू करने के तरीके :-


  • कंपनी या संस्था के सभी लोगो के साथ अलग अलग टीम बनाए
  • सभी टीम के सदस्य को प्रशिक्षित करें
  • शीर्ष प्रबंधन या उस टीम के लीडर का नाम प्रदर्शित करे ।
  • अलग अलग क्षेत्र अनुसार ज़ोन बनाए, और हर टीम को ज़िम्मेदारी दे ।
  • 1s के अनुसार वस्तुओ की जाँच करे और आवश्यक वस्तुओ की सूची तैयार करें ।
  • 2s के अनुसार आवश्यक वस्तुओ का स्थान निर्धारित करे, और अनावश्यक वस्तुओ को हटाये ।
  • 3s के अनुसार हर टीम अपने अपने जोन की सभी वस्तुओ और स्थान को साफ रखे ।
  • 4s के अनुसार उस क्षेत्र मे काम करने के नियम बनाए और नियमो का पालन कराये ।
  • 5s के अनुसार नियमित रूप से कार्यो को अपनी आदत बनाए, प्रत्येक जोन की निगरानी के लिए दूसरे जोन के ही लीडर को नियुक्त करे और स्कोर दिलाये ।
वैसे तो यह सिस्टम ज़्यादातर कंपनियो एवम अस्पतालो मे उपयोग होता है परंतु इसे हम अपने घरो मे भी अपना सकते है ।

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Wednesday, 29 January 2020

#19 Units for measurement-Metrics system Vs Imperial System

Units for measurement         


Today we will talk about an important topic related to engineering and that is Units for measurement.  Basically units of measure are present in two categories: Imperial Units and Metric units.

What Is the Imperial System?
          The British Imperial System was the official system of weights and measures in the United Kingdom from 1824 until they adopted the metric system in 1965. The Imperial system standardized measurements for units like pound and foot that had different meanings in different places. The United States Customary System is based off British Imperial units that existed previous to the Weights and Measures Act of 1824.


Imperial Units
The basic unit in the Imperial and U.S. customary systems is the:-

Length=                       (Inch-in, ft, Yard-yd, Mile-mi)
Weight=                       (Ounce-oz, Pound-lb, Stone-st,)
Area=                           (in2, ft2, yd2, mi2, Acre)
Liquid Volume=          (Gills, Pints, Quart, UK Gallon)
Volume=                      (in3, ft3, yd3,)
Temperature=             (Fahrenheit-ºF)
Energy=                       (British Thermal Unit-BTU)
Pressure=                    (Pounds per Square Inch-PSI)


           We know that the standard unit of length in imperial system  is ‘feet’ which is written in short as ‘ft.The different units of length are given here:
Units for measurement-Metrics system Vs Imperial System


Units for measurement-Metrics system Vs Imperial System


Units for measurement-Metrics system Vs Imperial System



What Is the Metric System?

          Based on the meter for length and kilogram for mass, the metric system was first adopted in France in 1795. After the French Revolution, the government asked scientists to look into replacing thousands of different traditional measurement systems with one that could unify the country. The meter was developed by measuring one-ten-millionth of the quadrant of Earth’s circumference running from the North Pole to the equator, through Paris. The new unit, equal to about thirty-nine inches, was called a meter, and all measurements were based upon it.

          The metric system, or SI (Systeme International), is based off this original meter and currently the official system of measurement for almost all countries, including the countries of the former British Empire, such as Australia. (Canada converted to the metric system in the ’70s and ’80s.) The SI units—fundamental units not based on any other units—are meter, kilogram, second, ampere (electricity), Kelvin (although Celsius is a more practical measurement for nonscientific applications), mole (chemistry), and candela (luminous intensity).
 
Metric Units
The basic unit in the Metric system & SI System is the:-

Length=                       (mm, cm, Meter-m, kilometre-km, Light Year)
Weight=                       (mg, g, kg, Tonne-t)
Area=                           (cm2, km2, m2, Hectare, Are)
Liquid Volume=          (Litre-l, Millilitre-ml)
Volume=                      (cm3, m3,)
Temperature=             (Kelvin-K, Celsius-ºC)
Energy=                       (Joule-J)
Pressure=                    (Pascal-Pa)


          We know that the standard unit of length is ‘Meter’ which is written in short as ‘m’.

The different units of length are given here:


Units for measurement-Metrics system Vs Imperial System







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Sunday, 20 October 2019

#01 Rain Water Harvesting ||बारिश के पानी के संग्रहण का तरीका ||

Translate:-English, हिन्दी

Rain Water Harvesting in buildings




क्या आप जानते है?

बारिश ही पीने योग्य पानी का एक मात्र स्रोत होता है, परन्तु आप का जबाब ,गिलेशियर, कुँए, बोरवेल, नदिया, तालाब आदि हो सकता है ओर आप सही भी है, लेकिन आप भूल जाते है कि हिमपात (Snowfall) वर्षा का ही रूप होता है, जिससे गिलेशियर बनते है और भूमिगत जल जैसे कुँए, बोरवेल, तालाब आदि का भण्डारण भी बारिश के पानी से ही होता है और नदिया भी जल के उच्च स्थान से निचले स्थान की ओर बहने वाला भूमिगत जल का ही स्रोत ही होता है, इसलिए हमे बारिश के पानी को जितना ज्यादा हो सके बचाना चाहिए और यह कार्य हम Rain Water Harvesting System के द्वारा कर सकते है,


यह सिस्टम लगाने के लिए हमे कुछ प्रमुख्य बिंदुओं की जानकारी होना आवश्यक है :-

1) छत का कुल क्षेत्रफल और उस पर इकट्ठा होने वाले पानी की मात्रा
उदाहरण :- माना की आप के घर के छत का साइज़ 30 फीट X 50 फीट है और रोजाना औसतन 10 मिलिमीटर बारिश होती है।

सबसे पहले सभी मूल्यों को मीटर मे बदल ले।

क्षेत्रफल =30x50 वर्ग फीट = 9.14x15.24 वर्ग मीटर

बारिश =10 मिमिमीटर = 0.01 मीटर

छत से पानी कि कुल निकासी = 9.14x15.24x0.01 घन मीटर = 1.39 घन मीटर

जैसा की हम जानते है 1 घन मीटर = 1000 लीटर

छत से पानी कि कुल निकासी = 1390 लीटर

इस तरह आप ने जाना कि यदि 24 घंटे मे 10 मिलिमीटर बरिश होती है तो छत से 1390 लीटर पानी भूमि मे रीचार्ज किया जा सकता है।

2) छत से निकासित पानी की मात्रा के आनुसार रीचार्ज पिट की भंडारण क्षमता




पहले बिन्दु पर की गयी गणना के अनुसार आप को कुल निकसित पानी का 60% से ज्यादा का पिट तैयार करना होगा ।

मतलब=1390 लीटर x 60% = 834 लीटर
हम यहा 1000 लीटर का पिट तैयार करेंगे जो की 1390 लीटर पानी को भूमि मे रीचार्ज करने के लिए पर्याप्त है।

3) रीचार्ज पिट मे एक नैचुरल फ़िल्टर तैयार करना
बारिश के पानी के संग्रहण का मुख्य भाग इसका रीचार्ज पिट होता है और इस पिट मे हमे एक प्रकृतिक फिल्टर बनाना होता है जिससे पानी साफ होकर भूमि मे जाए , इसके लिए आप को नीचे दिये कुछ समान कि जरूरत पड़ेगी :-

1) Yellow sand (पीली रेत)
2) Gravels (बजरी)
3) Charcoal (कोयले)
4) Boulders (बड़े पत्थर)



4) छत से निकासित पानी को पाइप लाइन की सहायता से रीचार्ज पिट तक जोड़ना
बारिश के पानी के संग्रहण मे अधिकांश खर्च उसकी पाइप लाइन के कारण ही आता है । इसका साइज़ न्यूनतम 3” से कम न रखे तथा छत के सभी निकासी पॉइंट से पानी को पाइप की सहायता से रीचार्ज पिट तक लेकर आए, याद रहे (First Flush)पहली बरिश के पानी की निकासी करने के लिए एक बाइपास लाइन अवश्य दे।




इस तरह हम कम खर्च में भी अपने लिए और अपने क्षेत्र के लिए बारिश के पानी को स्टोर करके भूमिगत जल का लेवल बड़ा भी सकते है और इसे गर्मी के दिनों के लिए स्टोर भी कर सकते है।


यदि हर घर, हर एक बिल्डिंग में यह सिस्टम लगा लिया जाये तो कुछ हद तक हम अपने क्षेत्र की पानी की समस्या से छुटकारा तो पा ही सकते है, लेकिन हमे पानी की बचत भी करना बहुत जरुरी है।

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