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Friday, 15 November 2019

#03 दो गरीब मछुआरे-कैसे आप की कम कमाई भी आप को अमीर बना सकती है

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ज्यादातर लोगों के मन में यह सवाल होता है।

अमीर कैसे बने ?????

जवाब पाने के लिए इस कहानी को ध्यान से पढ़ें।

"दो मछुआरों की कहानी (A Story of Two Fisherman)"

The story of two fishermen who tell the difference between the thinking of rich and poor.

एक शहर मे दो आदमी थे, एक अमीर और एक गरीब।



गरीब आदमी हमेशा भगवान से अपनी गरीबी की शिकायत करता रहता था ओर अपने भाग्य को कोसते रहता था। उसकी शिकायत थी की उस अमीर आदमी को भगवान सब कुछ आसानी से दे देते है ओर उसे उसकी कड़ी मेहनत के बाद भी बहुत कम मिलता है।

यह देख भगवान ने उसे एक दिन सबक सिखाने के लिए उन दोनों आदमियो को एक जैसी स्थिति मे लाकर रख दिया और दोनों को कमाई के लिए एक मछली पकड़ने की छड़ थमा दी ।

The story of two fishermen who tell the difference between the thinking of rich and poor.
The story of two fishermen who tell the difference between the thinking of rich and poor.




अब उन दोनों की कमाई का जरिया और घर की स्थिति एक समान थी। वे दोनों सुबह से मछ्ली पकड़ने जाते और शाम तक 10-10 मछलिया पकड़कर घर लाते।
पहला आदमी जो पहले से गरीब था उन दसो मछलियों को बेचकर ₹2000 रुपये घर लाता है, ओर उस शाम वह बहुत खुश रहता है और उसकी पूरी फैमिली को बाहर खाना खिलाने ले जाता है और पूरे पैसे खर्च कर देता है इस तरह वह रोजाना सारी मछलियां बेचकर पूरे पैसे खर्च कर देता था ।


The story of two fishermen who tell the difference between the thinking of rich and poor.

परंतु दूसरा व्यक्ति जो अमीर से गरीब हुआ था उन 10 में से 9 मछलियां बेच कर ₹1800 रुपये घर लाता है ओर एक मछली वह घर पर अपनी family के साथ पका कर खा लेता है

और अगले दिन के लिए ₹1000 रुपये का मछली पकड़ने का एक ओर छड़ लाता है तथा ₹500 रुपये में एक ओर आदमी को अपने साथ नौकरी पर रख लेता है और अपनी शेविंग के रूप में ₹300 रुपये जमा भी कर लेता है। इस तरह वह दूसरे दिन 20 मछलिया पकड़ पता है 19 मछलिया बेचकर ₹3800 घर लाता है 
The story of two fishermen who tell the difference between the thinking of rich and poor.




 

इन पैसो से भी वह 2000 रुपए के दो और छड़ खरीद लेता है ओर ₹500 रुपये के दो आदमियों को और अपने साथ नौकरी पर रख लेता है ओर ₹300 रुपये पुनः अपनी शेविंग के रूप में जमा कर लेता है और दौवारा से एक मछली अपनी फैमिली के साथ पका कर खा लेता है। इस तरह वह आदमी 2 दिनों में अपने लिए ₹600 रुपये सेविंग भी कर लेता है और अपने साथ 4 लोगों की एक टीम भी बना लेता है और अपने मछली पकड़ने के छड़ को भी एक से चार कर लेता है, हां वह अपनी फैमिली को स्वादिष्ट खाना तो नहीं खिला पाता, परंतु इतना जरूर खिलता है की उन सभी का पेट भर जाए। इस तरह वह लगातार अपनी तरक्की के रास्ते को बनाते जाता है और कुछ ही दिन में पहले से भी ज्यादा अमीर बन जाता है और जो पहला व्यक्ति रहता है वैसा ही गरीब का गरीब रह जाता है । 


The story of two fishermen who tell the difference between the thinking of rich and poor.


इसलिए किस्मत के भरोसे आप कभी अमीर बन भी गए तो आपको दोबारा गरीब बनने में देर नहीं लगेगी, अगर आप अपनी सोच पहले आदमी की तरह रखोगे तो।

एक अमीर और गरीब आदमी की विचारधारा (Ideology of a Rich man and Poor man)

        एक अमीर आदमी हमेशा पहले अपनी संपत्ति बनाता है उसके बाद वह अपनी जरूरतों पर खर्च करता है। जिससे वह अमीर से और अमीर होते जाता है। इस तरह वह हमेशा अपने काम मे एक निवेशक की सोच रखता है और अपनी तरक्की के रास्ते बनाते जाता है।

        परंतु एक मध्यम वर्ग का आदमी, हमेशा अपने पैसे पहले अपनी जरूरतों पर खर्च करता हे, जिससे उसकी जरूरते तो तेज़ी से बढ़ती जाती हे, परंतु उसकी आमदनी उस अनुपात मे नहीं बढ़ती जिससे वह एक समय उस स्थिति मे पहुच जाता है जहा उसके खर्चे उसकी आमदनी से ज्यादा हो जाते है, और इस स्थिति से वह अपनी मौजूदा आमदनी के सहारे बाहर नहीं निकाल पाता, और माध्यम वर्ग मे ही अपनी उम्र निकाल देता है। इस तरह वह हमेशा अपने पैसे को एक उपभोक्ता की तरह सिर्फ खर्च करता है जिसका रिटर्न उसे कुछ नहीं मिल पता।

इसलिए सबसे पहले अपनी सोच अमीरों वाली करे, आप की कम कमाई भी आप को अमीर बना सकती है ।

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